भाषण प्रतियोगिता और रंगोली व दीया डेकोरेसन प्रतियोगिता

दिनांक 28 अक्टूबर 2016 को जिम्प पायनियर स्कूल ग्राम पीतांबरपुर ,प्रेमनगर देहरादून में दीपावली के अवसर पर ‘’बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’’ के बारे में भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया| इस प्रतियोगिता में कक्षा 10 के सभी विध्यार्थियों ने भाग लिया| कक्षा 10 के सभी विध्यार्थियों को चार समूह में बांटा गया| इस अवसर पर विध्यालय के प्रधानाचार्य श्री जगदीश पाण्डेय ने कहा कि बेटे और बेटियों के बीच भेदभाव को खत्म करना चाहिए । ऐसा करके ही कन्या भ्रूण हत्या को रोका जा सकता है। बेटी-बेटे में भेद मानना लोगों की एक बड़ी भूल है। क्योंकि बेटियां होंगी तब ही संसार की कल्पना की जा सकती है। आज के समय में बेटियों का संरक्षण बहुत जरूरी है, उन्हें पढ़ाना है और आगे बढ़ाना है। इस दीपावली के अवसर पर हम सभी एकजुट होकर यह प्रण लें कि हम सभी लोग बेटियों से भेदभाव नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें बेटों के मुकाबले समानता का अधिकार देंगे, अपनी सोच बदलेंगे और बेटियों को मजबूत बनाएंगे।
विध्यालय के अध्यक्ष श्री के एन जोशी ने कहा कि बेटियों को समानता का अधिकार मिले, समाज में उनके साथ भेदभाव न हो, बेटियों को अच्छी शिक्षा-दीक्षा मिले। उन्होंने कहा कि आज बेटियां किसी से कम नही है। हर क्षेत्र में वह पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है बावजूद समाज में बेटे और बेटियों में फर्क किया जाना दुःखद है। कन्या भ्रूण हत्या जैसे सामाजिक अपराध को रोकने जन जागृति की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान कक्षा 10 के समूह क के लीडर नंदिनी भट्ट व अंजलि बिष्ट ने विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होने कहा हमें जरूरत इस बात की है कि महिलाएं बेटियों को बचाने के लिए आगे आएं। बेटियां हमारे लिए बोझ नहीं है वह भी हमारे परिवार और समाज का बराबर का हिस्सा है। जो कि अगर शिक्षित और सबल हो तो परिवार, समाज और देश के लिए लाभकारी हो सकती है।
भाषण प्रतियोगिता के अवसर पर समूह ख के लीडर कक्षा 10 की निकिता जोशी,कार्तिक शर्मा व उनके समूह ने कहा कि बालिकाओं के जन्म पर खूशियां मनाई जाएं न कि पुराने और दकियानुशी विचारों में फंसकर बालिकाओं के हितों का हनन हो ।लोग बेटा-बेटी में भेदभाव न करते हुए बेटियों को भी सशक्त बनाएं। आज भी समाज में भेदभाव, शोषण, अत्याचार, कन्या भ्रूण हत्या एवं दहेज प्रथा जैसी समाजिक बुराइयां अधिक हैं। सरकार ने महिला सुरक्षा व नारी सशक्तिकरण के लिए अनेक कानून बनाए हैं लेकिन समाज में जागृति लाना भी आवश्यक है।
समूह ग में कक्षा 10 के अभिषेक चौधरी व उनके समूह ने कहा कि “यह हमारी सामाजिक व्यवस्था की विसंगति है कि ज्यादातर घरों में लोग बेटे के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर करने को तैयार रहते हैं, उन के पैदा होने से लेकर उन के लालन-पालन, कैरियर व हर चीज में बेटों को बेटियों से ज्यादा अटैंशन व केयर दी जाती है, मगर जब बाद में वही बेटा अपने दायित्त्वों से हाथ झाड़ लेता है तो आंसू बहाते हैं| हाल ही में जब 12वीं के नतीजे घोषित हुए तो हर साल की तरह फिर से लड़कियों ने अपना परचम लहराया| सिर्फ सीबीएसई ही नहीं विभिन्न राज्यों की बोर्ड परीक्षाओं में भी लड़कियां लड़कों से आगे थीं, पर अफसोस, हम अकसर अपने घरों में बेटी की पढ़ाई में कोताही कर बेटों को ही पढ़ाते हैं| बेटों को आगे बढ़ाने का हरसंभव प्रयास किया जाता है, नतीजा यह होता है कि कई बार बेटे सिर्फ पढ़ाई और कैरियर में ही नहीं, जिंदगी की दौड़ में भी आगे निकलने के प्रयास में अपने मांबाप को बोझ समझने लगते हैं और इस बोझ को किसी ओल्ड एज होम या कहीं और उतार कर आगे बढ़ जाते हैं| अकसर उपेक्षित छोड़ दी गई लड़कियां मांबाप के ज्यादा करीब और उन के प्रति ज्यादा जिम्मेदार होती हैं|
समूह घ में कक्षा 10 के सौरव गौड़ व उनके समूह ने कहा कि बेटी को वरदान मान कर उसका आदर सत्कार करना चाहिए| हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यह बात स्वीकारी थी कि एक बेटी मांबाप के लिए 5 बेटों से बढ़ कर होती है. तो आज के बाद बेटी को भी बेटे जैसा ट्रीट करे और समाज को बदलने में सहयोग करे|
कार्यक्रम को श्री अर्जुन चौधरी (पी जी टी हिन्दी) ने तैयार किया व संचालन कक्षा 10 के सौरव गौड़ व निकिता जोशी ने किया |
दीपावली के अवसर पर जिम्प पायनियर स्कूल, स्थान-पीतांबरपुर ,आर्केडिया-ग्रांट,देहरादून मे हाउस वाइज़ रंगोली व दीया डेकोरेसन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया | कक्षा 2 से 10 तक के सभी स्कूली बच्चों ने इसमे भाग लिया |बच्चों ने होली के विभिन्न रंगों,रंगोली के रंगो ,चावल,गेंदे के फूलों की सहायता से गणेश जी, मोर, लक्ष्मी माता ,दुर्गा माता इत्यादि को रंगों से सजाकर रंगोली बनाई व दीयों को विभिन्न रंगो से सजाया |
कार्यक्रम के अंत में विजयी विध्यार्थियों को पुरुष्कृत किया|
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दिनांक 17  अगस्त 2016 को जिम्प पायनियर स्कूल में वाल्मीकि जयंती के अवसर पर विध्यार्थियों ने ग्राम-पीतांबरपुर आर्केडिया-ग्रांट देहरादून  में ग्रामवासियों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक किया व स्वच्छता का महत्व बताया |विध्यार्थियों ने पुराने समाचार पत्रों से लिफाफे बनाकर ग्रामीण दूकानदारों को बांटे व उन्हें पोलिथीन का दुष्प्रभाव बताते हुए पोलिथीन का प्रयोग बंद करने हेतु जागरूक किया |विध्यार्थियों ने ग्रामीणों को बताया कि  स्वस्थ जीवन जीने के लिए स्वच्छता का विशेष महत्व है। स्वच्छता अपनाने से व्यक्ति रोग मुक्त रहता है और एक स्वस्थ राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है। अत: हर व्यक्ति को जीवन में स्वच्छता अपनानी चाहिए और अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित  करना चाहिए।खाने से पहले हाथों को साबुन से धोने जैसी छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर व्यक्ति स्वस्थ रह सकता है।हमें सार्वजनिक स्थानों पर भी साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

इस अवसर पर विध्यालय के प्रधानाचार्य श्री जगदीश पाण्डेय ने कहा कि हमें अपने-अपने घरों का कचरा एक बड़े से डस्‍टबीन में रोज जमा करना चाहिए और घर के सभी सदस्‍यों को डस्‍टबीन का उपयोग करने को बाध्‍य करना चाहिए |घरों में  किसी भी आयोजन के उपरांत ऐसी स्थिति पैदा ना होने दें कि आयोजन का कचरा वहीं पड़ा रहे| पॉलीथिन का प्रयोग पूर्णतः वर्जित करके उसके स्थान पर  घर से स्‍वयं एक थैला लेकर निकलना चाहिए , क्‍योंकि जब तक ग्राहक दुकानदार से पोलीथिन मांगता रहेगा तब तक दुकानदार को भी ग्राहक बनाये रखने के लिये उसे पोलीथीन देना पड़ेगा|सबसे पहले हमें खुद को बदलना होगा, हमें स्वयं जागरुक होना होगा और अपने बच्चों, दोस्तों एवं पड़ोसियों को भी जागरुक करना होगा|

विध्यालय के अध्यक्ष श्री के एन जोशी ने कहा कि कूड़े को बाहर खुले में न फेंका जाए तथा नालियों की नियमित साफ सफाई की जाए,| प्लास्टिक का प्रयोग न किया जाए| कचरे से कुछ रासायनिक खाद भी बनायीं जाने लगी है जिसका उपयोग किसान अपने खेतो में फसल उगाने में कर सकता है| गांवों में प्रायः निकलने वाला कचरे का सीधे जैविक खाद के रूप में उपयोग हो सकता है जिससे आसपास साफ सफाई भी रहेगी और कचरे का भी उपयोग हो जायेगा| इस प्रकार हमारा गांव, शहर, मुहल्ला साफ सुथरा बना रहेगा|

विध्यार्थियों ने दूकानदारों को कहा कि  गाँव व शहर  में जो कचरा होता है उसे वर्गीकृत करें तो हम पाते हैं कि प्लास्टिक, कांच, धातुएं, कागज आदि ऐसा कचरा होता है जिसे रिसाइकिल किया जाना चाहिए, शेष बहुत सा कचरा बायोमास होता है जिसे सड़ाकर या अन्य विधियों से ईंधन के रूप में प्रयुक्त किया जाना चाहिए| ऐसे कचरे से बिजली भी बनाई जा सकती है|

इस अवसर पर सभी अध्यापक व अध्यापिकाएँ उपस्थित थी |

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वाल्मीकि जयंती

दिनांक 17  अक्टूबर 2016 को जिम्प पायनियर स्कूल में वाल्मीकि जयंती के अवसर पर विध्यार्थियों ने ग्राम-पीतांबरपुर आर्केडिया-ग्रांट देहरादून  में ग्रामवासियों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक किया व स्वच्छता का महत्व बताया |विध्यार्थियों ने पुराने समाचार पत्रों से लिफाफे बनाकर ग्रामीण दूकानदारों को बांटे व उन्हें पोलिथीन का दुष्प्रभाव बताते हुए पोलिथीन का प्रयोग बंद करने हेतु जागरूक किया |विध्यार्थियों ने ग्रामीणों को बताया कि  स्वस्थ जीवन जीने के लिए स्वच्छता का विशेष महत्व है। स्वच्छता अपनाने से व्यक्ति रोग मुक्त रहता है और एक स्वस्थ राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है। अत: हर व्यक्ति को जीवन में स्वच्छता अपनानी चाहिए और अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित  करना चाहिए।खाने से पहले हाथों को साबुन से धोने जैसी छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर व्यक्ति स्वस्थ रह सकता है।हमें सार्वजनिक स्थानों पर भी साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

इस अवसर पर विध्यालय के प्रधानाचार्य श्री जगदीश पाण्डेय ने कहा कि हमें अपने-अपने घरों का कचरा एक बड़े से डस्‍टबीन में रोज जमा करना चाहिए और घर के सभी सदस्‍यों को डस्‍टबीन का उपयोग करने को बाध्‍य करना चाहिए |घरों में  किसी भी आयोजन के उपरांत ऐसी स्थिति पैदा ना होने दें कि आयोजन का कचरा वहीं पड़ा रहे| पॉलीथिन का प्रयोग पूर्णतः वर्जित करके उसके स्थान पर  घर से स्‍वयं एक थैला लेकर निकलना चाहिए , क्‍योंकि जब तक ग्राहक दुकानदार से पोलीथिन मांगता रहेगा तब तक दुकानदार को भी ग्राहक बनाये रखने के लिये उसे पोलीथीन देना पड़ेगा|सबसे पहले हमें खुद को बदलना होगा, हमें स्वयं जागरुक होना होगा और अपने बच्चों, दोस्तों एवं पड़ोसियों को भी जागरुक करना होगा|

विध्यालय के अध्यक्ष श्री के एन जोशी ने कहा कि कूड़े को बाहर खुले में न फेंका जाए तथा नालियों की नियमित साफ सफाई की जाए,| प्लास्टिक का प्रयोग न किया जाए| कचरे से कुछ रासायनिक खाद भी बनायीं जाने लगी है जिसका उपयोग किसान अपने खेतो में फसल उगाने में कर सकता है| गांवों में प्रायः निकलने वाला कचरे का सीधे जैविक खाद के रूप में उपयोग हो सकता है जिससे आसपास साफ सफाई भी रहेगी और कचरे का भी उपयोग हो जायेगा| इस प्रकार हमारा गांव, शहर, मुहल्ला साफ सुथरा बना रहेगा|

विध्यार्थियों ने दूकानदारों को कहा कि  गाँव व शहर  में जो कचरा होता है उसे वर्गीकृत करें तो हम पाते हैं कि प्लास्टिक, कांच, धातुएं, कागज आदि ऐसा कचरा होता है जिसे रिसाइकिल किया जाना चाहिए, शेष बहुत सा कचरा बायोमास होता है जिसे सड़ाकर या अन्य विधियों से ईंधन के रूप में प्रयुक्त किया जाना चाहिए| ऐसे कचरे से बिजली भी बनाई जा सकती है|

इस अवसर पर सभी अध्यापक व अध्यापिकाएँ उपस्थित थी |

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