NCC Cadets Participated in “Mission Indradhanush “

दिनांक 27-01-2018 को जिम्प पायनियर स्कूल, आर्केडिया-ग्रांट , प्रेमनगर, देहरादून में सरकार द्वारा चलाये गए मिशन इंद्रधनुष के तहत एनसीसी केडेटों ने ग्राम-आर्केडिया-ग्रान्ट के अंतर्गत पीताम्बरपुर, श्यामपुर, बनियावाला आदि गाँव में घर-घर जाकर ग्रामवासियों को समय पर टीकाकरण करवाने के लिए प्रेरित किया तथा  उन्होने टीकाकरण ना करवाने की वजह से होने वाले बीमारियों जैसे हेपिटाइटिस-बी , डिफ्थेरिया ,बलगमटिटनस ,पोलियो ,तपेदिक  आदि के बारे में ग्रामवासियों को बताया | एनसीसी केडेटों ने गाँव के सभी घरों में ग्रामवासियों को भोजन करने से पहले सफाईपूर्वक साबुन से हाथ धोने के तरीकों को बताया तथा सर्दियों में गर्म कपड़ों  का इस्तेमाल करने की सलाह दी |
इस मिशन में  जिम्प पायनियर स्कूल के एनसीसी केडेटस अभिषेक चौधरी , अभिषेक वर्मा, आदित्य रावत, आकाश पुंडीर, अमन कुमार, अनीश मेहता, अर्जुन सैनी, आयुष जोशी, आयुष वर्मा, आयुष यादव, कार्तिक, कार्तिक शर्मा, कार्तिक वर्मा, मनीषा पाल, माया मेहरा, पंकज बिष्ट, प्रज्ज्वल थापा, प्रोहल थापा, राधिका महर, रिचा नेगी, सचिन राठौड़, सौरभ गौड़ , शिवानी रावत, सिद्दांत राठौड़, क्षितिज सिंह रावत ने भाग लिया |
अतः एनसीसी केडेट्स ने सामान्य टीकाकरण कार्यक्रम के लाभ से वंचित रह गए 2 वर्ष से कम के बच्चों और सभी गर्भवती महिलाओं को इस अभियान के बारे में बताया और टीका ना लगाने से होने वाले बीमारियों के लक्षण, कारण और उसके उपाय समझाये |
केडेट आकाश पुंडीर ने रुबेला के बारे में गाँव वालों को जागरूक किया कि रुबेला बच्चों में होने वाली हल्की बीमारी है, जिसमें बुखार, ददोरे और ग्रंथियों में सूजन होती है। मगर, यदि गर्भावस्था के शुरुआती आठ से 10 हफ्तों में आपको रुबेला होता है, तो यह आपके जरिये शिशु तक पहुंच सकता है। ऐसे में हो सकता है कि आपका शिशु बहरेपन, दृष्टिहीनता, दिल की समस्याओं या मस्तिष्क क्षति के साथ पैदा हो। एम.एम.आर. का टीका शिशु को रुबेला के विरुद्ध प्रतिरक्षित करता है।
केडेट शिवानी रावत ने ग्रामवासियों को  बताया कि डिफ्थीरिया ऊपरी श्वसन तंत्र का रोग है जो कोराइनीबेक्टेरियम डिफ्थीरी द्वारा होता है। यह एक गंभीर विकार है। सामान्यत: यह नाक और गले को प्रभावित करता है। यदि संक्रमण रक्त में प्रवेश कर जाये तो यह ह्रदय और तंत्रिका तंत्र दोनों को प्रभावित करता है तथा उसके लक्षणों को केडेट प्रजवल थापा ने बताते हुए कहा कि “उच्च तापमान वाला बुखार, गले में खराश, बैठी हुई आवाज (गहरा और भारी स्वर) ,कंपकंपी, गर्दन में सूजी हुई ग्रंथियाँ, मलेस (शारीरिक कष्ट), थकावट,निगलने और साँस लेने में कठिनाई, निगलने के दौरान दर्द, नाक से द्रव बहना, मोटी  ग्रे रंग की झिल्ली आपके गले और टॉन्सिल्स को ढंक लेती है।
केडेट अमन कुमार व केडेट क्षितिज सिंह रावत ने इसका कारण बताते हुए कहा कि  कोराइनीबेक्टेरियम डिफ्थीरी द्वारा डिफ्थीरिया होता है। इसे बढ़ाने वाले तत्वों के बारे में विस्तार में बताया जैसे हवा द्वारा लाए गए कण, व्यक्तिगत उपयोग की दूषित वस्तुएँ, घरेलू दूषित वस्तुएँ, संक्रमित घाव को छूने से।
केडेट अभिषेक चौधरी ने  बीमारी कुक्कुर खाँसी के बारे में बताते हुए कहा कि कुक्कुर खांसी या काली खांसी जीवाणु का संक्रमण होता है जो कि आरंभ में नाक और गले को प्रभावित करता है। यह प्रायः 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों की श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है। इस बीमारी का नामकरण इस आधार पर किया गया है कि इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति सांस लेते समय भौंकने जैसी आवाज करता है। यह तब होता है जब संक्रमण युक्त व्यक्ति खांसते या छींकते हैं। यह संक्रमण युक्त व्यक्तियों के शारीरिक द्रवों से संपर्क होने से भी फैलता है जैसे नाक का पानी गिरना।
केडेट प्रोहल थापा ने कहा कि सभी शिशुओं के लिए कुकर खांसी का टीका लगवाना आवश्यक है। यह टीकाकरण प्रायः डी॰टी॰पी संयुक्त रूप में डिप्थेरिया, टिटनेस और कुकर खांसी (परट्यूरसिस) दिया जाता है।
केडेट सचिन राठौड़ ने कहा कि टीकों के जरिये रोगों का समय पूर्व इलाज़ हो जाता है व उन्हें नियंत्रण में भी रखा जा सकता है विषाणु लगने से रोग पैदा होता है, पर टीके के जरिये शरीर में रोग का मुकाबला करने की शक्ति पैदा होती है|
केडेट अभिषेक वर्मा व केडेट सौरभ गौड़ ने पोलियो के बारे में बताया कि पोलियो का विषाणु दिमाग और मेरुदंड पर हमला करता है और लकवे का कारण बन सकता है। यह संक्रमित व्यक्ति के मल, बलगम या थूक के संपर्क में आने से फैलता है। आपके शिशु को मौखिक पोलियो टीका (ओ.पी.वी.) और इंजेक्शन से लगने वाला पोलियो टीका (आई.पी.वी.) दोनों लगाना आवश्यक हैं |
केडेट रिचा नेगी ने टिटनस रोग के बारे में बताया कि टिटनस रोग मांसपेशियों में दर्दभरी ऐंठन पैदा करता है। यह रोग जानलेवा भी हो सकता है। मिट्टी और पशुओं की खाद में मिलने वाले जीवाणु की वजह से यह रोग होता है। यह शरीर में चोट या घाव के जरिये प्रवेश कर सकता है। यह रोग किसी पशु के काटने से भी हो सकता है। डी0टी0पी0 के टीके से टिटनस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान की जाती हैं।
केडेट आदित्य रावत व केडेट राधिका महर ने टायफॉइड के बारे में बताया कि टायफॉइड एक जीवाण्विक रोग है। यह रोग संक्रमित व्यक्ति के मल या पेशाब के कारण दूषित भोजन या पेय पदार्थ के सेवन से फैलता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, बेचैनी, सिरदर्द, कब्ज या दस्त, छाती पर गुलाबी रंग के निशान शामिल है। टायफॉइड का टीका लगवाकर शिशु को इससे बचाया जा सकता है। 
केडेट अर्जुन सैनी ने कहा कि आँख प्रकृति द्वारा प्रदत्त सबसे खूबसूरत अंग है तो इसकी देखभाल आपको स्वयं रखनी होगी  इसलिए मोतियाबिंद जैसी बीमारी होने पर आंख को पानी या किसी भी अन्य तरल पदार्थ से न धोयें, आंख में फंसी किसी भी वस्‍तु को निकालने की कोशिश न करें, दबाव डाले बगैर आंख को कड़क कवच से ढकें तथा डॉक्‍टर से सलाह ले|
केडेट अनीश मेहता व केडेट मनीषा पाल ने मोतियाबिंद को विस्तार से बताते हुए कहा कि आंखों के लेंस आँख से विभिन्‍न दूरियों की वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। समय के साथ लेंस अपनी पारदर्शिता खो देता है तथा अपारदर्शी हो जाता है। लेंस के धुंधलेपन को मोतियाबिंद कहा जाता है। हालांकि आमतौर पर 55 वर्ष की आयु से अधिक के लोगों में मोतियाबिंद होता है, युवा लोग भी इससे प्रतिरक्षित नहीं हैं।
केडेट आयुष वर्मा और केडेट आयुष यादव ने वृद्ध व्यक्ति को ध्यान में रखते हुए कहा कि वृद्धावस्था में रक्तचाप कि परेशानिया होती है तो रक्तचाप रक्त धमनियों की दीवारों को जिस शक्ति के साथ धकेलता है, उस शक्ति के माप को रक्तचाप कहा जाता है | धमनियां रक्त को दिन से शरीर के अन्य भागों में ले जाने वाली नलिकाएं होती हैं जब दिल रक्त को बाहर पंप करने के लिए सिकुड़ता है, उस समय रक्त का दबाव सबसे ज्यादा होता है वयस्कों के लिए सामान्य रक्तचाप 120/80 मि. माना जाता है | आम तौर पर 140/90 से अधिक रक्तचाप को वयस्कों के लिए उच्च माना जाता है और 90/60 को कम |
केडेट माया मेहरा और केडेट पंकज बिष्ट ने हरी सब्जियों का महत्व समझाया |
केडेट कार्तिक और केडेट कार्तिक शर्मा ने पेट की  बीमारियो के बारे में लोगो को जागरूक किया और बताया कि किसी भी बीमारी को छोटा न समझकर शीघ्र विशेषज्ञ को दिखाएँ |
केडेट प्रज्ज्वल थापा व केडेट आयुष जोशी ने कहा कि हमारे जीवन में हरी सब्जियों का बहुत महत्व है और कहा कि पत्तीदार हरी शाक-सब्जियाँ शरीर के उचित विकास एवं अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होती है  क्योंकि इसमें सभी जरूरी पोषक-तत्व उपस्थित होते हैं जैसे कुछ सब्जियाँ है पालक और मेथी,राई  आदि पत्तेवाली सब्जियाँ। लौह की कमी से एनीमिया जैसी बीमारी हो सकती है तथा सलाह देते हुए कहा कि हरी सब्जियों में विटामिन सी को बचाये रखने के लिए उन्हें ज्यादा देर तक पकाना अनुचित है, क्योंकि पोषक तत्व जो मसूड़े को शक्ति प्रदान करते हैं जो अधिक पकाने से नष्ट हो जाते हैं।
Republic Day celebration at Jimp Pioneer School

Republic Day celebration at Jimp Pioneer School

दिनांक 26-01-2018 को जिम्प पायनियर स्कूल के प्रांगण में गणतंत्र दिवस  बड़े धूमधाम से मनाया गया ।  69वी वर्षगांठ का शुभारंभ विध्यालय के प्रधानचार्य श्री जगदीश पांडे ने  ध्वजारोहण करके किया | इस अवसर पर  छात्र छात्राओं ,शिक्षक शिक्षकाओं  व कर्मचारियों ने देश की आन-बान-शान की रक्षा का संकल्प लिया |

स्कूल केप्टन मनस्वी सती ने इस अवसर पर कहा कि “ डॉक्टर भीमराव अंबेडकर एवं उनके सहयोगियों के अथक प्रयास से निर्मित संविधान के जारी  होते ही भारत संप्रभुता संपन्न गणराज्य बन गया| इसी उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रुप में मनाया जाता है| गणतंत्र का अर्थ है एक ऐसी व्यवस्था जिसमें सत्ता जनसाधारण में समाहित हो| वैसे तो हमारा देश 15 अगस्त, 1945 को भी अंग्रेजों की दास्तां से आजाद हो गया था, किंतु इस स्वतंत्रता को वास्तविक अर्थ देश को प्रभुत्व संपन्न गणतंत्र राष्ट्र घोषित किए जाने के उपरांत ही मिला |”

वुमेन एंड चिल्ड्रेन हैल्थ एण्ड एजुकेशनल सोसाइटी की सदस्य श्रीमती प्रिया ने प्रत्येक विदध्यार्थी को अपने आस-पास के क्षेत्र में कम से कम पाँच निरक्षर व्यक्ति को साक्षर बनाने को कहा  तथा साथ ही पाँच पेड़ लगाकर उनकी सुरक्षा करने को कहा |

कक्षा प्ले ग्रुप के बच्चों उज्जवल, दिव्यान्शु नेगी, कृष्ण, ऋितिक यादव, श्रीयांश सैनी ने “चब्बी चीक्स….”  गीत प्रस्तुत किया व कक्षा के0 जी0 के बच्चों गौरव , आकृति ढौंडियाल , विराज बोहरा, इशांत नेगी, नवनीत गौड़ , यश पंवार, सोनाक्षी नेगी, खुसबू शर्मा, दिशा फरस्वान , स्मृती मिश्रा, अखिलेश रावत ने “भम- चीकी – भम भोले पे….” गाने पर  नृत्य व इट्स बब्बलिंग …..गीत प्रस्तुत किया | कक्षा नर्सेरी के विद्यार्थियो दिव्यान्शु, मनजीत, ऋषभ, प्रियंका, यश यादव, शांतनु, दीपेस नौडीयाल, अर्पिता चंदोला , समर्थ ने “आई एम हैप्पी टूड़े…..”  गीत प्रस्तुत किया तथा चौथी कक्षा के बच्चों आयशा बटोला, मनीषा, अंजना, आभा थापा, अंकिता पासी, वंशिका पंवार, रिया कुमारी, दीया, योगिता नेगी, समीर, हिमांशु थापा, अनुज नेगी, आदित्य थापा, करन, अर्चित पांडे ने “वी शैल ओवर कम…” गीत प्रस्तुत किया व छठी कक्षा के बच्चों अनुष्का, भौमिक, कशिश, साक्षी, प्रियंका ने “देश रंगीला …” पर नृत्य कर  देश के विभिन्न प्रान्तों को  प्रस्तुत किया व सातवीं कक्षा के बच्चों अंशिका धीमान, आकृति रावत, रिचा रावत, श्वेता ममगाई  ,अंकिता थापा, बबिता नेगी, रिया नौटियाल, निशिता जोशी, नेहा चौधरी, आरीबा मिर्जा, अमिशा नेगी ने “ये मत कहो खुदा से …” गीत प्रस्तुत किया|पाचवीं कक्षा के बच्चो प्रफुल पांडे, यश राज, स्नेहा शर्मा, निहारिका, गौरव राणा, नितिन, प्रियांशी नेगी, अजीत भंडारी, अरीबा मिर्जा ने “ए वतन…..” गीत गा कर सभी का मन मोह लिया|आठवीं कक्षा के आर्यन गुरूंग, प्रिंस भाटी, प्रीती चौधरी, पल्लवी चौहान, बिपाशा जोशी, प्रेरणा गौड़ , रश्मि जोशी, शगुन राठौर, श्वेता ममगाई , खुशबू सती, प्रियंका नेगी, समीक्षा थापा, पल्लवी राय, रिया चौधरी, आशा कुनियाल ने “सुनो गौर से दुनिया वालों….” गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया|दसवीं कक्षा के बच्चों शुभम भाऊ, खुशी ,उत्कर्ष बारव , दिव्यान्शु त्यागी ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया तथा अंत में विध्यालय की शिक्षिका ज्योति ने “गणतंत्र दिवस  आया …” गीत प्रस्तुत किया तथा शिवानी भट्ट व आयशा थापा ने “ए मेरे वतन के लोगो ……”  गीत प्रस्तुत किया |

विध्यालय  के चेयरमेन श्री के0 एन0 जोशी ने अपने भाषण में कहा कि हमारी मात्रभूमि कई वर्षों तक ब्रिटिश सरकार के अधीन थी । उस समय अंग्रेजी हुकूमत ने भारतीय लोगों को ज़बरदस्ती अपने कानून का पालन करने को कहा और ना मानने वालों के साथ अत्याचार भी किया। कई वर्षों के संघर्ष के बाद भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों की कड़ी मेहनत और जीवन न्योछावर करने के बाद भारत को अंग्रेज़ो से आज़ादी मिली । हमारे कुछ महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और नेताओं के नाम हैं – महात्मा गाँधीभगत सिंह, चन्द्र शेखर आजाद, लाला लाजपत राय, सरदार बल्लभ भाई पटेल, लाल बहादुर शास्त्री। उन्होंने लगातार कई वर्षों तक ब्रिटिश सरकार का सामना किया और हमारे देश को आज़ाद कराया। उनके इस बलिदान को हम कभी भी भुला नहीं सकते हैं और उन्हें हमेशा एक महान उत्सव और समारोह के जैसे ही दिल से याद करना चाहिए क्योंकि उन्ही की वजह से आज हम अपने देश में आज़ादी से सांस ले पा रहे हैं।

गौरव सेनानी भूतपूर्व सैनिक व अर्द्ध सैनिक संगठन के उपाध्यक्ष श्री मनवर सिंह जी ने कहा कि देश में चुनाव प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण एवं अनिवार्य प्रक्रिया है| उन्हों छात्र-छात्राओं से कहा कि वो 18 वर्ष के होने के बाद अपने मतदान का प्रयोग अवश्य करें  व  ईमानदार एवं कर्मठ नेता को  चुने| छात्र-छात्राओं को नशे के दुष्प्रभाव से भी अवगत करवाया और नशा मुक्त समाज की सकल्पना को जीवंत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होने कहा की आज कल अक्सर ये देखा जा रहा है कि युवा वर्ग इसकी चपेट में आ रहा है वह तरह-तरह के नशे जैसे- तम्बाकू, गुटखा, बीडी, सिगरेट और शराब के चंगुल में फँसता जा रहा है  जिसके कारण उनका कैरियर चौपट हो रहा है ।

कार्यक्रम के अंत में विध्यालय के प्रधानाचार्य श्री जगदीश पाण्डेय ने कहा कि आज हमारे देश को आजाद हुए 69 साल हो चुके हैं और हमें प्रगति की उस मंजिल तक पहुंचना है, जिसका सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था। हमें उनके आदर्शो पर चलते हुए देश के विकास में अपना योगदान देना होगा। गणतंत्र दिवस मनाने का उद्देश्य देश के नागरिकों द्वारा स्वतन्त्रता को सदैव बनाए रखने कि प्रेरणा देना हैं | देश में विभन्नताओ में एकता, सहयोग , भाईचारे की भावना में वृद्धि करना हैं | यह दिन राष्ट्रीय स्वतन्त्रता प्राप्ति आंदोलन में किए गए संघर्षो और बलिदानो की भी याद दिलाता हैं और स्वतन्त्रता हर मूल्य पर बनाए रखने की प्रेरणा देता हैं | गणतंत्र दिवस हमारी राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है |

अंत में सभी छात्रों को मिठाइयां बांटी गई और राष्ट्रगान के साथ गणतंत्र दिवस समारोह का समापन हुआ।

 

National Voters day celebration in Jimp Pioneer School

दिनांक 25-01-2018 को जिम्प पायनियर स्कूल, आर्केडिया-ग्रांट , प्रेमनगर, देहरादून में युवा भारतीय मतदाताओं को लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से  राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया गया | जिम्प पायनियर स्कूल के सेमिनार हाल में कक्षा 9,10,11,12 के छात्र व छात्राओं  को राष्ट्रीय मतदाता दिवस से संबन्धित निम्न विषयों में प्रोजेक्टर के माध्यम से फिल्म दिखाई गयी:-

1- 100% मतदान का महत्व

इसके अंतर्गत विध्यार्थियों को बताया गया कि हमारे देश में चुनाव प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण एवं अनिवार्य प्रक्रिया है |प्रत्येक व्यक्ति को अवश्य ही अपने मत का प्रयोग करना चाहिए व  ईमानदार एवं कर्मठ नेता का चुनाव करके प्रशासन को और सुदृढ़ बनाया जाना चाहिए| इस फिल्म के माध्यम से युवा  मतदाताओं को अपने मतदान के अधिकार के प्रति और अधिक जागरूक होने की आवश्यकता को बताया गया।

2- जनता के मन में चुनाव प्रक्रिया और प्रशासन में विश्वास  होना- जनता के मन में चुनाव प्रक्रिया और प्रशासन में और अधिक विश्वास हो इसके लिए   बुद्धिजीवी प्रतिनिधि व राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने वाले प्रतिनिधियों को चुनाव  लड़ना चाहिये|

3- अवश्य करें मतदान:-इसके अंतर्गत विध्यार्थियों को बताया गया कि आपका कीमती वोट किसी भी नेता का मूल्यांकन कर सकता है, जो पार्टी, जो नेता आप चुनेंगे वो जीत कर आएगा और यदि शत् प्रतिशत वोटिंग की  जाती है तो उस जीते हुए प्रतिनिधि की सोच बदल सकती है और वह हर क्षेत्र के हर व्यक्ति के लिए काम कर सकता है, जैसे कि – बिजली, पानी, सुरक्षा, शिक्षा, पेंशन, बाग़-बगीचे, सड़कें, आदि-आदि|

चुनाव प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण समझकर चुनाव के दिन घर में ही रहने का प्रयास न करें. अपितु परिवार के साथ घर के बाहर निकलकर अपना कीमती वोट डालें और चुनाव प्रक्रिया को सफल बनाइये.

निकिता जोशी (कक्षा-11 विज्ञान वर्ग ) की छात्रा ने कहा कि  हमारे देश में मतदान 25 जनवरी 1950 से मनाया जाता है क्यूंकि गणतंत्र राष्ट्र बनने के एक दिन पहले  चुनाव आयोग की स्थापना हुई थी। राष्ट्रीय मतदाता  दिवस का विचार एक आम वोटर कैप्टन चाँद ने साल २010 में दिया था। चुनाव आयोग ने सुझाव स्वीकार किया और इसमें सुधार करके 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस शुरू किया| २०11 में यह पहली बार मनाया गया| इस साल हम 8 वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस मना रहे हैं | राष्ट्रीय मतदाता दिवस को मनाने का  प्रमुख उद्देश्य यह है कि भारत का युवावर्ग और महिलाएँ मतदान के प्रति जागरूक हों तथा अपने कीमती मत का प्रयोग सही तरीके से कर सकें |

विध्यालय के शिक्षक श्री जगदीश चन्द्र जोशी (पी0 जी0 टी0 इतिहास ) ने  विध्यार्थियो को बताया गया कि 18 साल की उम्र हो जाने पर उनका मतदान करना उनके लिए ही नही बल्कि सभी युवा पीढ़ी के लिए आवश्यक है जब राष्ट्र का नागरिक एक मतदाता की नजर से मतदान करता है और चुनाव में सम्मिलित होकर देश तथा राज्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करता है तो वे अपने देश के एक सच्चे नागरिक की भूमिका बखूबी तरीके से निभा रहा होता है। हमारे मतदान से ही देश और राज्य का वर्तमान और भविष्य निर्धारित होता है क्योंकि हम जिस दल या प्रतिनिधि को चुनते है वो हमारा नेतृत्व करता है, हमें उसी के शासन और नीतियों पर ही चलना पड़ता है। अत: सोचसमझ कर ही अपने मतदान का प्रयोग करें |

प्रधानाचार्य  श्री जगदीश पांडे  ने विध्यार्थियों को कहा कि राष्ट्रीय मतदाता दिवस का उद्देश्य लोगों की मतदान में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ-साथ मतदाताओं को एक अच्छा साफ- प्रतिनिधि चुनने के लिए मतदान के लिए जागरूक करना है। हमारे लोकतंत्र को विश्व में इतना मजबूत बनाने के लिए मतदाताओं के साथ साथ भारत देश के  निर्वाचन आयोग का भी अहम् योगदान है। हमारे निर्वाचन आयोग की वजह से ही देश में निष्पक्ष चुनाव हो पाते हैं। आज राष्ट्रीय मतदाता दिवस के दिन देश के प्रत्येक मतदाता को अपनी 100 प्रतिशत सक्रिय भागीदारी के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए।

Jimp Pioneer School celebrated Subhash chandra Bose Birthday

आज दिनांक 23-01-2018 को जिम्प पायनियर स्कूल के प्रांगण में नेता सुभाष चंद्र बोस की जयंती धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य श्री जगदीश पांडे जी ने की व कार्यक्रम का शुभारंभ सुभाष चंद्र बोस के चित्र पर पुष्प अर्पित करके किया गया। प्रधानाचार्य श्री जगदीश पांडे जी ने नेताजी के जीवन परिचय पर प्रकाश डालाते हुए कहा  नेताजी सुभाष चंद्र बोस की वीरता से हम सभी  भारतीय गौरवान्वित हैं |
उनकी जयंती के मौके पर आज जिम्प पायनियर स्कूल परिवार उन्हें नमन करता है | आज भी भारतीय युवा पीढ़ी ,नौजवान  उनसे प्रेरणा ग्रहण करते हैं। वे भारत की अमूल्य निधि थे और रहेंगे। नेताजी’ के नाम से प्रसिद्ध सुभाष चन्द्र ने सशक्त क्रान्ति द्वारा भारत को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर, 1943 को ‘आज़ाद हिन्द सरकार’ की स्थापना की तथा ‘आज़ाद हिन्द फ़ौज’ का गठन किया इस संगठन के प्रतीक चिह्न पर एक झंडे पर दहाड़ते हुए बाघ का चित्र बना होता था। नेताजी अपनी आजाद हिंद फौज के साथ 4 जुलाई 1944 को बर्मा पहुँचे। यहीं पर उन्होंने अपना प्रसिद्ध नारा, “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” दिया। तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा, इस नारे के बाद सभी जाति और धर्मों के लोग खून बहाने के लिए उठ खड़े हुए। आजाद हिन्द फौज ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, नागालैंड और मणिपुर में आजादी का झंडा लहराया। नेताजी ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान, अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए जापान के सहयोग से आजाद हिन्द फौज का गठन किया।

समीक्षा थापा कक्षा-8 की छात्रा ने बताया कि  नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा में कटक के एक संपन्न बंगाली परिवार में हुआ था। बोस के पिता का नाम ‘जानकीनाथ बोस’ और माँ का नाम ‘प्रभावती’ था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वक़ील थे। प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल मिलाकर 14 संतानें थी, जिसमें 6 बेटियाँ और 8 बेटे थे। सुभाष चंद्र उनकी नौवीं संतान और पाँचवें बेटे थे। अपने सभी भाइयों में से सुभाष को सबसे अधिक लगाव शरदचंद्र से था।

नेताजी ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई कटक के रेवेंशॉव कॉलेजिएट स्कूल में हुई। तत्पश्चात् उनकी शिक्षा कलकत्ता के प्रेज़िडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से हुई, और बाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा (इण्डियन सिविल सर्विस) की तैयारी के लिए उनके माता-पिता ने बोस को इंग्लैंड के केंब्रिज विश्वविद्यालय भेज दिया। अँग्रेज़ी शासन काल में भारतीयों के लिए सिविल सर्विस में जाना बहुत कठिन था किंतु उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया।

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्‍हें आजादी दूंगा….! जय हिन्द। इन नारों से देश को नई ऊर्जा देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीयता की पहचान हैं। आज भी युवा उनसे प्रेरणा ग्रहण करते हैं। वह ऐसे वीर सैनिक हैं, जिनकी गाथा इतिहास सदैव गाता रहेगा। ‘जय हिन्द’ का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया। उन्होंने सिंगापुर के टाउन हाल के सामने सुप्रीम कमांडर के रूप में सेना को संबोधित करते हुए दिल्ली चलो का नारा दिया। सबसे पहले महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहकर नेताजी ने ही संबोधित किया था।

वीर सावरकर ने देश के क्रांतिकारियों के सम्मान में एक सम्मेलन आयोजित किया और इस सम्मेलन में अध्यक्ष के आसन पर नेताजी के तैलचित्र को आसीन किया। यह एक क्रांतिवीर द्वारा दूसरे क्रांतिवीर को दी गई अभूतपूर्व सलामी थी। अंग्रेजी शासन काल में भारतीयों के लिए सिविल सर्विस में जाना बहुत कठिन था, लेकिन सुभाष चंद्र बोस ने सिविल सर्विस की परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया। आजादी की जंग में हिस्सा लेने के लिए अपनी नौकरी का इस्तीफा देने वाले वह पहले आईसीएस अधिकारी थे। सिविल सर्विस छोड़ने के बाद वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़ गए। उन्होंने देश से बाहर रहकर स्वतंत्रता आंदोलन चलाया।

इस अवसर पर  सभी छात्र-छात्राएँ और शिक्षक-शिक्षिकाएँ आदि उपस्थित थे।

Kumaon Sanskritik program

मकर सक्रांति पर्व के अवसर पर जिम्प पायनियर स्कूल ग्राम-पीतांबरपुर ,आर्केडिया-ग्रान्ट देहरादून के छात्र-छात्राओं द्वारा कुमाऊनी सांस्कृतिक व संरक्षण समिति देहरादून के साथ मिलकर ग्राम- बनियावाला, आर्केडिया-ग्रान्ट देहरादून में उत्तराखंड की सांस्कृतिक वैभव, प्राकृतिक सौंदर्य और सम्पदा से  सम्पन्न कुमाऊँ-गढ़वाल,जौनसार  अंचल  के आचार-विचार, रहन-सहन, खान-पान, वेशभूषा, प्रथा-परम्परा, रीति-रिवाज, धर्म-विश्वास, गीत-नृत्य, भाषा बोली सबको   नृत्य व गीतों के माध्यम से दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया |विध्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति द्वारा बताया कि  लोक साहित्य की यहाँ समृद्ध वाचिक परम्परा विद्यमान है, जो पीढी-दर-पीढ़ी आज भी जीवन्त है। कुमाऊँ-गढ़वाल  का अस्तित्व  वैदिक काल से है। स्कन्द पुराण के मानस खण्ड व अन्य पौराणिक साहित्य में मानस खण्ड के नाम से वर्णित क्षेत्र वर्तमान कुमाऊँ मंडल ही है।

इस अवसर पर कुमाऊनी सांस्कृतिक व संरक्षण समिति देहरादून के सहयोग से सबसे पहले दर्शकों को खिचड़ी बनाकर खिलाई गई | लगभग 550 लोगों ने खिचड़ी खाई |यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे खिचड़ी वितरण से प्रारम्भ होकर साँय 7 बजे तक चला|

इस अवसर पर जिम्प पायनियर स्कूल के प्रधानाचार्य श्री जगदीश पांडे ने कहा कि इस  कार्यक्रम का  मुख्य उद्देश्य यह है कि  जो लोग  कुमाऊँ-गढ़वाल-जौनसार  क्षेत्र से पलायन कर के आये हैं  उन सभी लोगो को एक मंच के अंतर्गत लाना है ये लोग आपस में दुःख-सुख में एक दूसरे के काम आयें और एक दूसरे का सहयोग करें साथ ही साथ  अपने समाज के साथ सभी वर्गों की निस्वार्थ भाव से मदद करें |

जिम्प पायनियर स्कूल के प्रधानाचार्य श्री जगदीश पांडे ने कुमाऊनी सांस्कृतिक व संरक्षण समिति देहरादून के कार्यक्रम की एंकरिंग कुमाऊनी भाषा में की व सभी दर्शकों को अपने-अपने बच्चों को अपनी पहाड़ की भाषा में घर पर आपसी बातचीत में पहाड़ी भाषा का प्रयोग करने को कहा |उन्होने पहाड़ से पलायन पर एक कविता सुनाई जिसका अर्थ था कि “आज पहाड़ में  गाँव-गाँव पलायन का शिकार हो चुके हैं ऊखल बीरान व आँगन सुनसान हो चुके हैं | हमारे पित्रों के मकान अकेले रह गए हैं ,इन मकानों को आशा है कि हम सभी पहाड़ में आकर अपने पित्रों के बीमार मकानों को ठीक करवाएँगे ,ये बंद दरवाजे हमारी बाट जोह रहे हैं |आज ये बंद मकान रो रहे है ,तुम्हारे पैरों के निशानों को ढूंढ रहे हैं | आमा का धोती लगाकर भात पकाना बूबू का चिलम में तंबाकू गूढ़कोना और बच्चों का दही-दूध सुड्कोना इस बीमार घर को सब याद है लेकिन ये बीमार घर बेजुबान है इसलिए कुछ नहीं कह सकता |ये पित्रों के मकान कहते हैं कि कम से कम साल में दो बार अपने पहाड़ में आओ और इन बीमार मकानों का इलाज कराओ ,पहाड़ के अपने इष्ट-देवताओं के पास जाओ, अपने बच्चों को अपने रिश्तेदारों से मिलाओ |हमारे पित्रों के मकान हमको आशीर्वाद देते हैं |”

इस अवसर पर कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री शिव प्रसाद देवली ने कहा कि  हमें अपनी लोकसंस्कृति की जड़ों से जड़ों से विलग नहीं होने देना चाहिए। पलायन करके दिल्ली, मुम्बई में बसने वाले लोग अपनी भाषा, संस्कृति से परहेज करने लगे हैं जो पलायन से उभरा अच्छा लक्षण नहीं है| पहाड़ की संस्कृति तब ही जीवित रहेगी  जब लोग पहाड़ में रहेंगे अगर लोग पहाड़ों से पलायन करके यूँ ही दिल्ली मुंबई आदि बड़े शहरों में जाते हैं  तो वे वहाँ स्थायी रूप से  बस कर वहां की संस्कृति को धारण कर लेते हैं। कल्पना कीजिये कि शहरों में रहने वाले  कितने लोग गढ़वाली और कुमाउनी व जौनसारी  भाषा का प्रयोग करते हैं। अमूमन वे  लोग जो पहाड़ में अपना यौवन काट कर आये हैं या फिर जो अपने बच्चों के साथ अपनी जिंदगी कि अंतिम पारी खेल रहे हैं केवल वे ही पहाड़ी भाषा बोलते हैं  पर वो युवा वर्ग  जो यहां पैदा हो रहा है और वो जो तरक्की की  दौड़ में शामिल है उसे पहाड़ की    संस्कृति-सभ्यता से कोई मतलब नहीं रहता है। पलायन पीड़ा के इस दर्द का अहसास महसूस किया जा सकता है। उत्तराखंड के मकान, दीवारें  सब खंडहर बन गए हैं, गांव के गांव खाली हो चुके हैं और पानी की तरह जवानियां मैदानों की ओर बहती जा रही हैं। बस बचे हैं तो बचे खुचे दरवाजे पर चलने में असमर्थ पैर पसारे बूढ़ेबुजुर्ग। यही है हमारे उत्तराखंड के पलायन पीड़ा की दर्द भरी दास्तान

कार्यक्रम में जिम्प पायनियर स्कूल के विध्यार्थियों राहुल पिमोली (कक्षा-12 विज्ञान),समीक्षा थापा(कक्षा-8),सुनीता कुमारी (कक्षा -11 वाणिज्य),पल्लवी चौहान(कक्षा-8),प्रियंका नेगी(कक्षा-8),प्रीति चौहान(कक्षा-8),विपाशा जोशी(कक्षा-8)  ने गीतों व नृत्य आदि अपनी प्रस्तुतियों से यह संदेश दिया कि “गढ़वाल-कुमाऊँ-जौनसार की  लोक संस्कृति हमारे हृदय में बसती है हम जहां भी रहें यह संस्कृति हमें ऊर्जा प्रदान करती है। हम लोक संस्कृति के गागर से अपनी जड़ों को सींचते रहेंगे तो उसी में अपार सुख है, जीवन का   मधुमय रस है , मातृभूमि की गोद में बैठ कर वात्सल्य भाव पाने की जीवन पद्धति है। हमारे नौले और पनघट हमारी प्रतीक्षा कर रहे हैं। हम कभी कभार वहां जाकर उन अपने पैतृक जल स्रोतों से पानी भरते रहेंगे तो वे भी जीवित रहेंगे और हमारी छैल छबीली पैतृक लोक संस्कृति भी जीवित रहेगी जिस पर हमको इतना नाज है और जो कस्तूरी की तरह हमारी सांसों और संस्कारों में रची बसी है। फूलदेही हो या हरेला या फिर घी संक्रांत ,घुघुती हमें बरबस अपनी जड़ों को सींचने, उनमें खुशबू भरने के लिए प्रेरित करती  हैं।इन्हें मनाने में हमको आनंद की अपार अनुभूति इसलिए होती है क्योंकि हम पहाड़ की  लोकसंस्कृति की गागर से अपनी जड़ों को पानी दे रहे होते हैं और हम स्वयं को तरो ताजा भी अनुभव कर रहे होते हैं |”

कार्यक्रम के अन्त में जिम्प पायनियर स्कूल के विध्यार्थियों द्वारा “नशामुक्त राष्ट्र का निर्माण “ नाटक प्रस्तुत किया |जिसको देखकर दर्शकों की आँखों में आँसू छलक आए | इस नाटक में  कक्षा 11 वीं के छात्र-छात्राएं निकिता जोशी, बबीता रावत, सोनम कलूरा, दिव्या तोमर, गौरव पाल, आयुष जोशी, आयुष यादव और  नितिन कुमार ने संयुक्त रूप से “नशामुक्त राष्ट्र का निर्माण” पर एक नाटक प्रस्तुत किया| इस नाटक के माध्यम से अपने पति के शराब के नशे से परेशान महिला की दशा को मंच पर उजागर किया। इसमें दर्शाया गया की किस प्रकार उसका पति हर समय शराब के नशे में रहता है और उसकी पत्नी उसे समझाती है कि इस नशे ने तो कई परिवारों को तोड़ा है| जो इसके चंगुल में फंस गया वह स्वयं तो बर्बाद होता ही है इसके साथ ही साथ उसका परिवार भी बर्बाद हो जाता है । वह शराबी पति अपनी पत्नी व बच्चो को शराब के नशे में मारता है | उसकी पत्नी घर-घर जाकर लोगो के घरों में जाकर झाडू-पोछा करती है और अपना व अपने परिवार का गुजारा चलाती है लेकिन उसका पति उसके कमाये हुए रुपये , गहने जेवरात आदि छीन कर सारी कमाई शराब में उड़ा देता है | अंत में शराबी की पुत्री द्वारा समझाने पर उसका पिता शराब पीना छोड़ देता है| इस नाटक के माध्यम से दर्शकों  को शराब व नशा न करने का संदेश दिया गया व बेटियों की रक्षा करने उन्हें बेटों के समान ही विकास के समान अवसर प्रदान करने और पूरे राष्ट्र की ताकत बनाने का संदेश दिया गया |

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय विधायक देहरादून केंट श्री हरबंश कपूर ने  जिम्प पायनियर स्कूल के विध्यार्थियों द्वारा गढ़वाल-कुमाऊँ-जौनसार की  लोक संस्कृति को जीवित रखने के लिए की प्रस्तुतियों  व “ नशामुक्त राष्ट्र का निर्माण” नाटक की बहुत प्रशंसा की  व कहा कि   इस देवतुल्य धरा को पलायन भूमि बनाने के लिए जो कारण  जिम्मेदार हैं उनको सभी के प्रयासों से दूर करने का प्रयास किया जाएगा|  

मुख्य अतिथि माननीय विधायक देहरादून केंट श्री हरबंश कपूर व देहरादून भारतीय जनता पार्टी के पूर्व महानगर अध्यक्ष श्री उमेश अग्रवाल द्वारा अन्त में विध्यार्थियों को व विध्यालय के प्रधानाचार्य श्री जगदीश पांडे को  नशामुक्त समाज बनाने के लिए किए जा रहे कार्यों के लिए पुरस्कृत किया|

कार्यक्रम में देहरादून भारतीय जनता पार्टी के पूर्व महानगर अध्यक्ष श्री उमेश अग्रवाल ने कहा कि   मातृभूमि को तभी खुशहाल बनाया जा सकता है जब उसकी धरती में हल चले, गांव के खेत खलिहान पशुधन से समृद्ध हों। लोग फसल के लिए आत्मनिर्भर हों|

इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में श्री चंद्रमोहन नेथानी (आर0एस0एस कार्यकर्ता ), शश्री प्रेम सिंह भण्डारी (सामाजिक कार्यकर्ता),श्री देवेंदर सिंह भण्डारी(सामाजिक कार्यकर्ता) कुमाऊँ , कुमाऊनी सांस्कृतिक व संरक्षण समिति देहरादून के सभी पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित थे |

Celebrated Swami Vivekananda’s Jayanti 2018

Celebrated Swami Vivekananda’s Jayanti 2018

दिनांक 12-01-2018 को स्वामी विवेकानन्द जयंती व युवा दिवस महोत्सव समारोह 2018 के अवसर पर आशारानी ज्ञानचंद जैन सरस्वती शिशु मंदिर,नया गाँव ,पेलियो, शिमला बाइ पास रोड ,देहरादून के प्रांगण में प्रात: 10:30  बजे जिम्प पायनियर स्कूल के विध्यार्थियों द्वारा “नशामुक्त राष्ट्र का निर्माण” जागरूकता कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया| इस कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि माननीय श्री प्रेमचंद अग्रवाल जी अध्यक्ष उत्तराखंड विधानसभा द्वारा किया गया |

इस अवसर पर जिम्प पायनियर स्कूल के प्रधानाचार्य श्री जगदीश पांडे ने कहा कि वह स्वामी विवेकानंद की जयंती पर उन्हें प्रणाम करते हैं| बता दें कि आज राष्ट्रीय युवा दिवस भी है| अध्यात्म के क्षेत्र में किए गए स्वामी विवेकानंद के कार्यो को देखते हुए हर साल उनकी जयंती 12 जनवरी को ‘युवा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है|  स्वामी विवेकानंद भी ऐसी ही महापुरुष थे जिनके वचन युवाओं में एक नई जान फूंक सकते हैं।

कार्यक्रम के अन्त में कक्षा 11 वीं के छात्र-छात्राएं निकिता जोशी, बबीता रावत, सोनम कलूरा, दिव्या तोमर, गौरव पाल, आयुष जोशी, आयुष यादव और  नितिन कुमार ने संयुक्त रूप से “नशामुक्त राष्ट्र का निर्माण” पर एक नाटक प्रस्तुत किया| इस नाटक के माध्यम से अपने पति के शराब के नशे से परेशान महिला की दशा को मंच पर उजागर किया। इसमें दर्शाया गया की किस प्रकार उसका पति हर समय शराब के नशे में रहता है और उसकी पत्नी उसे समझाती है कि इस नशे ने तो कई परिवारों को तोड़ा है| जो इसके चंगुल में फंस गया वह स्वयं तो बर्बाद होता ही है इसके साथ ही साथ उसका परिवार भी बर्बाद हो जाता है । वह शराबी पति अपनी पत्नी व बच्चो को शराब के नशे में मारता है | उसकी पत्नी घर-घर जाकर लोगो के घरों में जाकर झाडू-पोछा करती है और अपना व अपने परिवार का गुजारा चलाती है लेकिन उसका पति उसके कमाये हुए रुपये , गहने जेवरात आदि छीन कर सारी कमाई शराब में उड़ा देता है | अंत में शराबी की पुत्री द्वारा समझाने पर उसका पिता शराब पीना छोड़ देता है| इस नाटक के माध्यम से दर्शको को शराब व नशा न करने का संदेश दिया गया जिसे हमारे मुख्य अतिथि माननीय श्री प्रेमचंद अग्रवाल जी अध्यक्ष उत्तराखंड विधानसभा तथा अतिविशिष्ट अतिथि श्री सहदेव सिंह पुंडीर माननीय विधायक सहसपुर विधानसभा व दर्शको ने भी काफी सराहा |

मुख्य अतिथि माननीय श्री प्रेमचंद अग्रवाल जी अध्यक्ष उत्तराखंड विधानसभा ने कहा कि युवाओं में राष्ट्रीयता की भावना जागृत करने में स्वामीजी का अहम योगदान रही है। उनके देशभक्ति को विश्व ने लौहा माना है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने देश को एकता के सूत्र में बांधने का प्रयास किया। उन्होंने उन्नत व शक्तिशाली भारत बनाने के लिए उनके आदर्श को आत्मसात करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा के बिना विकास संभव नहीं है। श्री प्रेमचंद अग्रवाल जी ने छात्र-छात्राओ को दो-दो हजार रुपये देने की घोषणा की|

इस महोत्सव समारोह के स्वागतकर्ता श्री सुखवीर सिंह बुटोला, श्री मुकेश आनंद ,श्री मनीष गुप्ता ,श्री मौ0 आरिफ़ ,श्री दयानन्द जोशी,श्री अनुज बंसल ,श्री  जगदीश पाण्डेय ,श्री विनीत चौधरी , श्री रमेश चंद मित्तल ,श्री मानस गर्ग , श्री के0 पी0 रतूड़ी, श्री प्रेम सिंह भण्डारी , श्री राकेश नैनवाल, श्री वेध अशोक पुंडीर , श्री अतर सिंह, श्री सतीश पुंडीर ,श्री नरेंद्र किशोर कश्यप, जिम्प पायनियर स्कूल के विद्यार्थी व सरस्वती शिशु मंदिर नया गाँव के विद्यार्थी थे |

             

Jimp Pioneer School Conducted an awareness program on “Nashamukt Rashtra ka Nirman”

दिनांक 31-12-2017  को पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार जिम्प पायनियर स्कूल व गौरव सेनानी भूतपूर्व सैनिक व अर्द्ध सैनिक संगठन देहरादून के सौजन्य तथा जनता इंटरमीडिएट  कालेज ,नया गाँव ,मल्हान शिमला बाइ पास रोड ,देहरादून के प्रांगण में प्रात: 10:00  बजे जिम्प पायनियर स्कूल के विध्यार्थियों द्वारा “नशामुक्त राष्ट्र का निर्माण” जागरूकता  कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया| इस कार्यक्रम का उद्घाटन गौरव सेनानी भूतपूर्व सैनिक व अर्ध सैनिक संगठन के अध्यक्ष श्री महावीर सिंह राणा, मुख्य अतिथि रा0इ0 कॉलेज, किशनपुर, देहरादून के प्रधानाचार्य श्री धोम सिंह नेगी जी व विशिष्ट अतिथि ब्रहम कुमारी श्रीमति वर्षा जी द्वारा किया गया |

इस अवसर पर जिम्प पायनियर स्कूल के प्रधानाचार्य श्री जगदीश पांडे ने छात्र-छात्राओं को नशे के दुष्प्रभाव से अवगत करवाते हुए नशा मुक्त समाज की सकल्पना को जीवंत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होने कहा की आज कल अक्सर ये देखा जा रहा है कि युवा वर्ग इसकी चपेट में आ रहा है वह तरह-तरह के नशे जैसे- तम्बाकू, गुटखा, बीडी, सिगरेट और शराब के चंगुल में फंसती जा रही है । जिसके कारण उनका कैरियर चौपट हो रहा है । दुर्भाग्य है कि आजकल नौजवान शराब और धूम्रपान को फैशन और शौक के चक्कर में अपना लेते हैं । इन सभी मादक प्रदार्थों के सेवन का प्रचलन किसी भी स्थिति में किसी भी सभ्य समाज के लिए वर्जनीय होना चाहिए|

जिम्प पायनियर स्कूल के कक्षा 11 वीं के विद्यार्थियों मधुजा चमोली, प्रमिला रावत, दिव्या तोमर, सोनी, मनीषा पाल, निकिता जोशी, बबीता रावत, ऋषिका नेगी, सोनम कलूरा, शीतल, प्रियंका नेगी, शिवानी, आयुष जोशी, सुनीता ने एक गढ़वाली लोक गीत  “कनी कनी करली करू …………… ” पर नृत्य प्रस्तुत किया| जिसमें अपने पति के नशे से परेशान महिला को नृत्य के माध्यम से मंच पर उजागर किया। इसमें दर्शाया गया की किस प्रकार उसका पति हर समय नशे में रहता है और उसकी पत्नी उसे समझाती है कि इस नशे ने तो कई परिवारों को तोड़ा है| जो इसके चंगुल में फंस गया वह स्वयं तो बर्बाद होता ही है इसके साथ ही साथ उसका परिवार भी बर्बाद हो जाता है । अंत में उसका पति नशा छोड़ देता है|

कार्यक्रम के अन्त में कक्षा 11 वीं के छात्र-छात्राएं निकिता जोशी, बबीता रावत, सोनम कलूरा, दिव्या तोमर, गौरव पाल, आयुष जोशी, मो0 मोइन, आयुष यादव और  नितिन कुमार ने संयुक्त रूप से “नशामुक्त राष्ट्र का निर्माण”  पर एक नाटक प्रस्तुत किया| इस नाटक के माध्यम से बताया गया कि आज विश्वभर के अनेक लोग इन नशीले पदार्थो का सेवन कर रहे है। आज नवयुवकों, स्कूलों और कॉलेजों में पढऩे वाले बालकों  में इस दुर्व्यसन ने अपने पैर जमा लिए है। इसके सेवन से व्यक्ति शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार से असामान्य बन जाता है। यह एक सामाजिक बुराई है, जिसे न केवल कानून व दण्ड के बल पर दूर करना है अपितु देश की जनता में सामाजिक चेतना, जागृति और हमें एकजुट प्रयास की जरूरत है। इसी संदेश को सभी के समक्ष प्रस्तुत करते हुए सकारात्मक प्रेरणा के साथ लोगों में जागरूकता उत्पन्न करने की चेष्टा की गई।

 

मुख्य अतिथि रा0इ0 कॉलेज, किशनपुर, देहरादून के प्रधानाचार्य श्री धोम सिंह नेगी जी ने नशे की  बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि नशे से मुक्त होने के लिए आत्मबल जरूरी है। उन्होंने कहा कि चार माह तक नशे से दूर रहकर किसी भी प्रकार का नशा छोड़ा जा सकता है। नशे का सबसे अधिक दुष्प्रभाव महिलाओं को झेलना पड़ता है। शराब से शारीरिक क्षति होने के साथ ही आर्थिक और सामाजिक समस्याएं पैदा होती हैं। नशा उन्मूलन के लिए जागरूकता को महत्वपूर्ण हथियार बताया। युवाओं और बच्चों तक के नशे की गिरफ्त में आने पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी नशे की गर्त में जा रही है और इसके दुष्परिणाम में भविष्य में पूरे देश को झेलने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि महिलाओं को जागरूक होना जरूरी है।

गौरव सेनानी भूतपूर्व सैनिक व अर्ध सैनिक संगठन के अध्यक्ष श्री महावीर सिंह राणा ने कहा कि नशा एक अभिशाप है । यह एक ऐसी बुराई है, जिससे इंसान का अनमोल जीवन समय से पहले ही मौत का शिकार हो जाता है । नशे के लिए समाज में शराब,  गुटखा, तम्‍बाकु और धूम्रपान (बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, चिलम) सहित चरस, स्मैक, कोकिन, ब्राउन शुगर जैसे घातक मादक दवाओं और पदार्थों का उपयोग किया जा रहा है । इन जहरीले और नशीले पदार्थों के सेवन से व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक हानि पहुंचने के साथ ही इससे सामाजिक वातावरण भी प्रदूषित होता ही है साथ ही स्‍वयं और परिवार की सामाजिक स्थिति को भी भारी नुकसान पहुंचाता है । नशे के आदी व्यक्ति को समाज में हेय की दृष्टि से देखा जाता है ।

गौरव सेनानी भूतपूर्व सैनिक व अर्द्ध सैनिक संगठन के उपाध्यक्ष श्री मनवर  सिंह जी ने कहा कि आज नौजवान वर्ग इस ओर किस प्रकार की रुचि रख रहा है तथा उनको समझाने की जरूरत है। नशे के सेवन से शारीरिक, सामाजिक, आर्थिक व मानसिक तौर पर नुकसान होता है।

विशिष्ट अतिथि ब्रहम कुमारी श्रीमति वर्षा जी ने  कहा कि विद्यार्थियों को नशे के आदी लोगों व नशे के सौदागरों से दूर रहने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि नशा बहुत सारे परिवारों को तोड़ने के कार्य करने के साथ-साथ घरों के घर भी खत्म कर रहा है। साथ ही स्कुल व कॉलेजों में बुरे संगत में पड़ कर लोगो का जीवन बर्बाद हो जाता है। जीवन बर्बाद न हो  इसके लिए  नशा मुक्त उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश में नशाबंदी करना भी जरुरी है।

 

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