An awareness program on the environmental hazards of plastic carry bags

In an attempt to create awareness on the environmental hazards of plastic carry -bags and encourage the use of paper bags, NCC Cadets of Jimp Pioneer School Vill-Pitamberpur, Arcadia-Grant, Premnagar Dehradun prepared newspaper bags from wasted News papers and visited different villages of Arcadia-Grant (Pitamberpur, Baniyawala, Gorakhpur etc.) from 08-03-2018 to 13-03-2018 and created consciousness among the villagers, especially, the women.

NCC Cadets of Jimp Pioneer School explained the villagers, retired people,housewives that plastic is widely used in our day to day life. Starting from a pen to a polythene bag, in which we carry fruits and books are forms of plastic. Though convenient in our day to day use, it has posed an alarming threat to the environment. Plastic is non-biodegradable and does not decay by biological action of microbes.

They remain in the same state as we throw them. So, dumps or garbages are created making our cities and soil polluted. To destroy plastics, we can either recycle or burn them. If we burn plastic, it emits harmful chemical gases like carbon dioxide (CO2), carbon monoxide (CO), nitrous oxide (NO), methane (CH4), sulphur dioxides (SO2), etc. These gases pollute our environment, though in negligible content, they add to green house effect and endanger our environment.

The Principal of Jimp Pioneer School, Shri Jagdish Pandey told the women that we can reduce plastic waste by using our own garment bags or paper bags when we go to the shop .He said that a paper bag can carry a weight of five to ten Kg of vegetables, provided the  base of the bag is strong.

The villagers, mostly farmers, retired people and housewives found the awareness program very useful. They said the craft of making paper bags and cloth was very interesting and can be made during leisure hours.

The NCC Cadets told the retired persons, who have a lot of time to start manufacturing paper bags and cloth bags on a large scale as there is large scope to market this product.

Housewives of the villagers felt that making and selling paper bags and cloth bags is an ideal and cost-effective business for housewives.

Villagers praised the efforts and work strategic of the NCC Cadets of Jimp Pioneer School for reducing the use of plastic bags.

Painting Contest on “Save flora and fauna for better health”

दिनांक 10-03-2018 को जिम्प पायनियर स्कूल, आर्केडिया-ग्रांट , प्रेमनगर, देहरादून के  एनसीसी केडेटों के मध्य   “बेहतर स्वास्थ्य के लिए फ्लोरा एंड फौना का महत्व ”  विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में 25 एन0सी0सी0 केडेटों  ने हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता में बनाई गयी पेंटिंग्स के माध्यम से केडेटों ने यह संदेश दिया कि वनस्पतियाँ  व जीव जन्तु प्रकृति की अनुपम देन हैं और पृथ्वी पर पारिस्थितिकी सन्तुलन कायम रखने में ये अहम भूमिका निभाते हैं। औद्योगीकरण और विकास प्रक्रियाओं से पर्यावरण में फैलते प्रदूषण  को एक स्तर तक नियन्त्रित करने की इनकी क्षमता प्रकृति प्रदत्त है। मनुष्य को अपना भविष्य सुरक्षित रखना है तो उसे वनस्पतियों व जीवों के संरक्षण के प्रति और सचेत होना होगा| इन्हीं कारणों से वनस्पति व जीव संरक्षण एवं वृक्षारोपण कार्यक्रमों को सारे विश्व में प्राथमिकता मिल रही है। मानव को अपना भविष्य सुरक्षित रखने के लिये इन कार्यों को और गम्भीरता से अपनाना होगा। जंगल न होने पर प्रायः सभी जीव नष्ट हो जाएँगे और यदि संयोग से मानव बच भी गया तो खरगोश, चूहे, काकरोच,  चींटी जैसे अन्य छोटे जीव उसे जीने नहीं देंगे।

श्री बीर सिंह चौहान (जिम्प पायनियर स्कूल में  एएनओ एन0सी0सी0 ) ने कहा कि वैज्ञानिकों का कहना है  संसार में पाई जाने वाली 20,000 वनस्पतियों का उपयोग हम भोजन के लिये कर सकते हैं, पर आज तक हमने केवल 3,000 वनस्पतियों का उपयोग ही समय-समय पर किया है। व्यापारिक स्तर पर केवल 150 वनस्पतियों की खेती भिन्न –भिन्न कालों में की गयी है |कई बहुमूल्य औषधियाँ ब्लू बेरी ,अश्वगंधा ,मुलहटी कलौंजी ,जखिया ,चोरा ,हरड़ ,तेल,  मूँगफली, दालचीनी, आदि जंगलों की देन हैं। यदि आज उपलब्ध आधी वनस्पतियाँ कुछ हजार वर्ष पूर्व लुप्त हो गई होती तो आज हम पेनिसिलिन व कई एंटीबायोटिक दवाओं से वंचित रह जाते |

जिम्प पायनियर स्कूल के प्रधानाचार्य श्री जगदीश पाण्डेय ने कहा कि प्राणी अपने जीवन हेतु वनस्पति जगत पर आश्रित है| मनुष्य हवा में उपस्थित ऑक्सीजन को श्वास द्वारा ग्रहण करके जीवित रहता है| पेड़-पौधे ही प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया में ऑक्सीजन छोड़ते हैं | इस तरह मनुष्य के जीवन का आधार पेड़-पौधे ही उसे प्रदान करते हैं | इसके अतिरिक्त प्राणियों का आहार वनस्पति है | वनस्पति ही प्राणियों को पोषण प्रदान करती है | इसलिए पर्यावरण संरक्षण बहुत जरुरी है | प्राचीनकाल में ऋषि-मुनि अपने आश्रम के पास वन लगाते थे | उन्हें पर्यावरण संरक्षण के विषय में जरुर पता रहा होगा | वे वृक्ष-वनस्पतियों को प्राणिजगत का जीवन मानते थे और उन्हें बढ़ाने को सर्वोपरि प्रमुखता देते थे |हमारे धर्मशास्त्रों में तुलसी,वट,पीपल,आंवला आदि वृक्षों को देव संज्ञा में गिना गया है |वृक्ष मनुष्य परिवार के ही अंग हैं,वे हमें प्राण वायु प्रदान करके जीवित रखते हैं | वे हमारे लिए इतने अधिक उपयोगी हैं ,जिसका मूल्यांकन करना कठिन है | अतएव हमें अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का प्रयत्न करना चाहिए| आज सभी लोगों का यह प्रयास होना चाहिए कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाएं |

इस प्रतियोगिता में  जिम्प पायनियर स्कूल के निम्न एनसीसी केडेट्स  ने भाग लिया :-

S.N Name of  Cdts Cadet No. Address Email ID
1 Abhishek Chaudhary 101220 Smithnagar, Premnagar, Dehradun abhishekchaudhary50202@gmail.com

 

2 Abhishek Verma 101221 Shyampur Premnagar, Dehradun kartikverma1@gmail.com

 

3 Aditya Rawat 101222 Badonwala Premnagar, Dehradun ar6470149@gmail.com

 

4 Akash Pundir 101223 Badonwala Premnagar, Dehradun pundirakash5311@gmail.com 
5 Aman Verma 101224 Umedpur Premnagar, Dehradun amanverma4151@gmail.com

 

6 Anish Kumar 101225 Mithi Beri Prem Nagar Dehradun ak640085@gmail.com

 

7 Arjun Saini 101226 Krishna Vihar Prem Nagar Dehradun arjunsaini0909@gmail.com

 

8 Ayush Joshi 101227 Smithnagar Premnagar, Dehradun meenakshijoshi181@gmail.com

 

9 Ayush Verma 101228 Shyampur Premnagar, Dehradun vayush082@gmail.com

 

10 Ayush Yadav 101229 Pitamberpur, Premnagar, Dehradun ayushyadavqq@gmail.com

 

11 Kartik 101230 CR Camp , Premnagar, Dehradun shkartik2000@gmail.com

 

12 Kartik Sharma 101231 Ambiwala,, Premnagar, Dehradun kartiksharma7351@gmail.com

 

 

13 Kartik Verma 101232

Premnagar,

Dehradun

kartikverma1@gmail.com
14 Manisha Pal 101233 Jhiverhedi, Premnagar, Dehradun manishapal681@gmail.com 
15 Maya Mehra 101234 Smithnagar, Premnagar, Dehradun  

rt2014@gmail.com

 

16 Pankaj Bisht 101235 Raghav Vihar, Premnagar, Dehradun pankubhai157@gmail.com

 

17 Prajjwal Thapa 101236 Pitamberpur, Premnagar, Dehradun yasht800@gmail.com

 

18 Prohal Thapa 101237 Sevli , Premnagar, Dehradun prohal472001@gmail.com

 

19 Radhika 101238 Sevli , Premnagar, Dehradun bishtrajesh193@gmail.com 
20 Richa 101239 Thakurpur, Premnagar, Dehradun jiwantinegi2016@gmail.com

 

21 Sachin Kumar Rathore 101240 Premnagar , Dehradun sachinrathore126@gmail.com

 

22 Saurabh Gaur 101241 Mithi Beri,Prem Nagar ,Dehradun shivamgaur070399@gmail.com

 

23 Shivani  Rawat 101242 Baniyawala Premnagar, Dehradun vikramsinghrawat1976@gmail.com

 

24 Sidhant Rathor 101243 Smithnagar , Premnagar, Dehradun sidhanty21@gmail.com

 

25 Sitij Singh Rawat 101244 Ambiwala, Premnagar, Dehradun sitijsingh@gmail.com

 

          

Jimp Pioneer School celebrated “International Women’s Day”

दिनांक 08-03-2018 को “अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस “ के अवसर पर जिम्प पायनियर स्कूल, आर्केडिया-ग्रांट , प्रेमनगर, देहरादून के  एनसीसी केडेटों ने ग्राम-पीतांबरपुर ,श्यामपुर, बनियावाला आदि गाँव में घर-घर जाकर ग्रामवासियों को पॉलीथिन के प्रयोग से होनी वाली हानियां व इस समस्या का निदान बताया| एनसीसी केडेटों ने कक्षा 7 व 8 के विद्यार्थियों की मदद से सर्वप्रथम रद्दी अखबार को इकट्ठा कर रद्दी  अखबार के  लिफाफे जिम्प पायनियर स्कूल में  बनाकर पीतांबरपुर, श्यामपुर, बनियावाला आदि गाँव में घर-घर जाकर ग्रामवासियों को रद्दी अखबार के लिफाफे बाँटें व उन्हें पॉलीथिन का  उपयोग न करने के प्रति जागरूक किया |इन रद्दी अखबारों के बने लिफाफों में पॉलीथिन के नुकसान व समस्या का समाधान लिखकर चिपकाया गया व इन्हें ग्रामीणों को दिया गया |

एनसीसी केडेट कक्षा 11 विज्ञान वर्ग अभिषेक चौधरी, माया मेहरा व आदित्य रावत ने बताया  कि पॉलीथिन के प्रयोग से सांस और त्वचा संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे लोगों मेँ कैंसर का भी खतरा बढ़ा रहा है। स्थिति यह है कि पॉलीथिन के उपयोग के कारण लोगों पर जीवन भर रोगों का संकट मंडराता रहता है। यही नहीं, यह गर्भस्थ शिशु के विकास को भी रोक सकती है। नष्ट न होने के कारण यह भूमि की उर्वरा शक्ति को खत्म कर रही है। यदि इसे दस वर्ष तक भी जमीन में दबाए रखा जाए यह तब भी नहीं गलती है। पॉलीथिन  देश में गिरते भूजल स्तर की एक बड़ी वजह साबित हो रही है।

एनसीसी केडेट कक्षा-11  (विज्ञान वर्ग) कार्तिक शर्मा व सौरव गौड़ ने अपने विचारों में कहा कि यदि हम पॉलीथिन को जलाते हैं तो इससे निकलने वाला धुआं ओजोन परत को नुकसान पहुंचाता है जो ग्लोबल वार्मिंग का एक बड़ा कारण है। प्लास्टिक के ज्यादा संपर्क में रहने से लोगों के खून में थेलेट्स की मात्रा बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार पॉलीथिन  का कचरा जलाने से कार्बन-डाईआक्साइड, कार्बन-मोनोआक्साइड एवं डाईआक्सींस जैसी विषैली गैस उत्सर्जित होती हैं। इनसे सांस, त्वचा आदि की बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है। पॉलीथिन सीवर जाम का सबसे बड़ा कारण है। इससे गंदे पानी का बहाव बाधित होता है जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान होता है।

एनसीसी केडेट कक्षा (11 वाणिज्य वर्ग) अर्जुन सैनी, क्षितिज रावत व  मनीषा पाल(11 मानविकी वर्ग) ने ग्रामवासियों को इस समस्या का समाधान बताते हुए कहा कि पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए पॉलीथिन के बजाय कपड़ा, जूट, कैनवास, नायलाँन और कागज के बैग का इस्तेमाल सबसे अच्छा विकल्प है। सरकार को पॉलीथिन के विकल्प पेश कर रहे उद्योगों को प्रोत्साहन देना चाहिए साथ ही इन उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए जनता में जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। इसके लिए लोगों को भी अपनी आदत में बदलाव लाना चाहिए। जब भी घर से बाजार के लिए निकलें कपड़ा या जूट का बैग साथ लेकर जाएं। यानी पॉलीथिन का विकल्प कपड़ा, जूट, कैनवास, नायलाँन और कागज के बैग का इस्तेमाल ही समाधान है।

जिम्प पायनियर स्कूल के प्रधानाचार्य ने ग्रामवासियों से कहा कि पॉलीथिन कचरे से देश में प्रतिवर्ष लाखों पशु-पक्षी मौत का ग्रास बन रहे हैं। लोगों में तरह-तरह की बीमारियां फैल रही हैं, जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है तथा भूगर्भीय जलस्रोत दूषित हो रहे हैं। प्लास्टिक उत्पादों में प्रयोग होने वाला बिस्फेनॉल रसायन शरीर में डायबिटीज व लिवर एंजाइम को असामान्य कर देता है। अत: आवश्यक है कि  प्लास्टिक थैलियों के विकल्प के रूप में जूट और कपड़े से बनी थैलियों को लोकप्रिय बनाया जाना चाहिए |

श्री अर्जुन सिंह (पी0जी0टी0 हिन्दी) ने विध्यार्थियों व ग्रामवासियों को समझाते हुए कहा कि कि मोटी पॉलीथिन में कार्बन और हाइड्रोजन की विशेष यूनिट होती है। यह ऐसा रसायनिक जोड़ है, जो टूट नहीं सकता। यही कारण है कि मोटा पॉलीथिन सड़ता नहीं है।

श्री पवन खत्री (पी0जी0टी0 गणित) ने कहा कि  पॉलीथिन पेट्रो-केमिकल उत्पाद है, जिसमें हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल होता है। रंगीन पॉलीथिन मुख्यत: लेड, ब्लैक कार्बन, क्रोमियम, कॉपर आदि के महीन कणों से बनता है, जो जीव-जंतुओं व मनुष्यों सभी के स्वास्थ्य के लिए घातक है।

श्री बीर सिंह  (एन0सी0सी0 एएनओ) ने ग्रामवासियों को बताया कि कि एनसीसी एक संस्कारित संगठन है। जो निस्वार्थ भाव से देश ही नहीं, समाज के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रही है।  एनसीसी कैडेट अनुशासन, सेवा एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि एनसीसी में शामिल होकर छात्र के व्यक्तित्व का तेजी से विकास होता है। एनसीसी कैडेट सैनिक की तरह अनुशासित दिनचर्या को जीवन का हिस्सा बनाता है। उन्होंने कहा कि एनसीसी देश का सबसे बड़ा स्वयंसेवी छात्र संगठन है और इसका तेजी से विस्तार भी हो रहा है। एनसीसी कैडेट सभी राज्यों में दैवीय आपदाओं व अन्य मुश्किल परिस्थितियों में सदैव सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। इसी क्रम में आज जिम्प पायनियर स्कूल के एनसीसी केडेट ने “अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस” के अवसर पर घर-घर जाकर ग्रामवासियों को प्लास्टिक के नुकसान के बारे में बताया |इस जागरूकता अभियान की ग्रामीणों ने विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं ने बहुत प्रशंसा की |

श्री बीर सिंह ने बताया कि प्लास्टिक के थैले रंग और रंजक, धातुओं और अन्य तमाम प्रकार के अकार्बनिक रसायनों को मिलाकर बनाए जाते हैं। रंग और रंजक एक प्रकार के औद्योगिक उत्पाद होते हैं जिनका इस्तेमाल प्लास्टिक थैलों को चमकीला रंग देने के लिये किया जाता है। इनमें से कुछ कैंसर को जन्म देने की संभावना से युक्त हैं तो कुछ खाद्य पदार्थों को विषैला बनाने में सक्षम होते हैं। रंजक पदार्थों में कैडमियम जैसी जो भरी धातुएं होती हैं वे फैलकर स्वास्थ्य के लिये खतरा साबित हो सकती हैं।

इसमें जागरूकता अभियान में स्कूल के एनसीसी केडेटों के साथ-साथ  स्कूल के प्रधानाचार्य श्री जगदीश पाण्डेय , स्कूल के अध्यापक व अध्यापिका अर्जुन सिंह (पी0जी0टी0 हिन्दी), पवन खत्री (पी0जी0टी0 गणित), बीर सिंह (एन0सी0सी0 एएनओ ) , ज्योति गुप्ता (टी0जी0टी0 हिन्दी), शालिनी (कोर्डिनेटर) भी शामिल थे|

                

Holi was celebrated at Jimp Pioneer School

On 28-02-2018 Holi was celebrated at Jimp Pioneer School. All students of Jimp Pioneer School  enjoyed the colours of happiness and love with their friends and teachers on this occassion. Holi is the festival of colours and it is one of the most popular, vibrant, exciting and also a fun festival of the year. It is a Hindu festival based on the theme of victory of good over evil. It is also a celebration of spring ; the return of the colours, new leaves and new flowers around us.