Importance of Mathematics Subject

दिनांक 27-04-2018 को प्रात: 11 बजे जिम्प पायनियर स्कूल ग्राम-पीतांबरपुर , आर्केडिया-ग्रान्ट , देहरादून में “गणित विषय के लाभ” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया | कार्यशाला में कक्षा- 6, 7, 8 में अद्द्यनरत सभी विद्यार्थियों ने भाग लिया | कार्यशाला में Hyderabad से कार्यक्रम में सम्मिलित हुए मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता श्री एम॰ राजगोपाला राव (Executive Director, Chief Knowledge Officer(Retd.),ONGC Principal Coach, SWIS Member- Governing Body, Haryana Saraswati Heritage Development Board(HSHDB), Govt of Haryana, Senior Fecilitator, Empretec, UNCTAD) ने विद्यार्थियों को बताया कि गणित विज्ञान का आधार रही है। विश्व में यदि शून्य नहीं होता, तो शून्य अर्थात अंतरिक्ष को खंगालने का क्रम शायद आरंभिक रूप भी नहीं ले पाता। भारत की इस देन को विश्व सदियों से स्वीकार करता चला आया है। गणित के क्षेत्र में हमारी पुरातन संस्कृति का योगदान रहा है|विश्व में शून्य का सर्वप्रथम उल्लेख अथर्ववेद में प्राप्त होता है। यजुर्वेद में इसके लिए क्षुद्र शब्द का प्रयोग किया गया है।पाँचवी शताब्दी में आर्य भट्ट ने दशमल्व पद्धति का प्रयोग किया था। उस के पश्चात ब्रह्मगुप्त ने दशमलव के प्रयोग सम्बन्धी नियम बनाये जो आज भी मान्य हैं।अरब वासियों ने भारतीय अंकों को ‘हिन्दसे ’ (भारत से) कह कर अपनाया और इस ज्ञान को अफरीका तथा योरूप में ले कर गये।“ श्री एम॰ राजगोपाला राव ने आर्य भट्ट, ब्रह्मगुप्त, तथा भास्कराचार्य के द्वारा गणित के क्षेत्र में किए गए आविष्कारों को विदद्यार्थियों को विस्तार से बताया व गणितीय प्रश्नों को सरल विधि से करने के तरीके बताए | इस अवसर पर विदद्यालय के प्रधानाचार्य श्री जगदीश पाण्डेय ने कहा कि गणित, विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एक महत्वपूर्ण उपकरण (टूल) है। भौतिकी, रसायन विज्ञान, खगोल विज्ञान आदि विषयों को गहराई से समझने के लिए गणित अद्दयन आवश्यक है । सभी बच्चे गणित सीख सकते हैं और सभी बच्चों को गणित सीखना चाहिए। इसलिए यह अत्यावश्यक है कि हम सभी बच्चों को सबसे अच्छे स्तर की गणितीय शिक्षा प्रदान करें। इस कार्यक्रम में श्री एम॰ राजगोपाला राव के साथ उनकी टीम के सदस्य श्रीमती अनीता मेयर (केंद्रीय विद्यालय से अवकाश प्राप्त शिक्षिका) ,अवकाश प्राप्त प्रधानाचार्या श्रीमती शोभा धामनी आदि उपस्थित थे |